1) आम आदमी पर पड़ी मंहगाई की मार|
वो भी एक दम शांत हो सहता अत्याचार|
सहता अत्याचार और अब कोई न चारा|
दो पाटों के बीच में पिसता है बेचारा|
बस हिसाब ही करता रहता छोड़ छाड़ सब काम|
आम आदमी बन गया चूसा हुआ एक आम|
2) लाल रंग ने कर रखा है यू पी ऐ को लाल|
न्यूक डील ने देख लो कैसा किया कमाल|
कैसा किया कमाल की जान गले में अटकी|
कामधाम सब छोड़ यू पी ऐ भी पथ भटकी|
राजनीति ने खा लिए जाने कितने साल|
लाल रंग वाले बने अब गुदड़ी के लाल|
सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव Said:
on July 4, 2008 at 1:06 pm
मजा आ गया। महंगाई की मार से कराह रहा था लेकिन आपने हंसा दिया
प्रभाकर पाण्डेय Said:
on July 4, 2008 at 1:43 pm
चटपटा और व्यंग्यात्मक। मजेदार। साधुवाद।