चंदू लाल के छंद

1) आम आदमी पर पड़ी मंहगाई की मार|
वो भी एक दम शांत हो सहता अत्याचार|
सहता अत्याचार और अब कोई न चारा|
दो पाटों के बीच में पिसता है बेचारा|
बस हिसाब ही करता रहता छोड़ छाड़ सब काम|
आम आदमी बन गया चूसा हुआ एक आम|

2) लाल रंग ने कर रखा है यू पी ऐ को लाल|
न्यूक डील ने देख लो कैसा किया कमाल|
कैसा किया कमाल की जान गले में अटकी|
कामधाम सब छोड़ यू पी ऐ भी पथ भटकी|
राजनीति ने खा लिए जाने कितने साल|
लाल रंग वाले बने अब गुदड़ी के लाल|

2 Comments »

  1. सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव Said:

    मजा आ गया। महंगाई की मार से कराह रहा था लेकिन आपने हंसा दिया

  2. प्रभाकर पाण्डेय Said:

    चटपटा और व्यंग्यात्मक। मजेदार। साधुवाद।


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